एक हिंदी यथार्थवादी व्यंग्य

एक आम आदमी सुबह सुबह टीबी का रिमोट ओन करता है
और समाचार सुनाता है की ””
कुछ चीजे सरकार ने सस्ती कर दी है
करो में रियायतें कर दी है
और तो और ये भी सुन लिया कि
सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होंगी
सभी योजनाये फलीभूत होंगी
और न किसी का बलात्कार होगा
बिना पैसो के साक्षात्कार होगा
कोई फूथपाथ पर नहीं सोयेगा
अब महंगाई से कोई नहीं रोयेगा
कोई बच्चा कुपोषित नहीं रहेगा
अब शोषण कोई नहीं सहेगा
राशन की दुकानो पे फिर अनाज मिलेगा
फिर कोई नया समाज बनेगा
कोई अब भूखा नहीं रहेगा
खेतो में भी सुखा नहीं रहेगा
मंडी में नहीं अब अनाज सड़ेगा
अब न कोई किसान मरेगा

शाम को वो आम आदमी फिर घर आता है
फिर से रिमोट ओन किया जाता है
फिर सुनता है , निर्वाचन आयोग ने आगामी आगामी चुनाओ की घोषणा कर दी है
फिर वो हसता है और फिर अपने सभी शंकाओ को भूलकर
अपनी फटी चादर के सुख की आगोश में सो जाता है

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