ढूंढता है

अजब हाल है इस रिवायती दौर में
हाल अपना बताने को कोई बेखबर ढूंढता है

इस दौर जो झुके है किसी के आगे
वो नासमझ अपना सर ढूंढता है

ये रिश्ते है बड़े कच्चे जरा एहतियात रखना
भीड़ में भी अपनों को दर बदर ढूंढता है

कोई तो कहे हम उनके है
उन परदनसीनो में कोई नज़र ढूंढता है

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