ये समाँ, समाँ है ये प्यार का

ये समाँ
समाँ है ये प्यार का
किसी के इंतज़ार का
दिल ना चुराले कहीं मेरा
मौसम बहार का
ये समाँ…

बसने लगे आँखों में
कुछ ऐसे सपने
कोई बुलाए जैसे
नैनों से अपने
नैनों से अपने
ये समाँ…

मिलके खयालों में ही
अपने बलम से
नींद गंवाँई अपनी
मैंने क़सम से
मैंने क़सम से
ये समाँ…

Leave a Reply