कुछेक मुक्तक

1 . ज़िन्दगी बीती सारी पर न कोई मददगार पाया
ढूंढा हमने प्यार पर सिर्फ बाजार पाया

2 . हमने बसाया था उन्हें आँखों में आसमान की तरह
छोड़ गए वो बाजार में सामान की तरह

3 . उनके बाद जो हाल हमारा हुआ
क़त्ल हमारा सरे आम हुआ

4 . मै उनके हांथों का पैमाने ही सही जो टूट गया
खैर कुछ वक्त तो हमें होठो से लगाये रखा

5 . ख्वाहिश क्या हुई हमें आसमान को छूने की
हम अपने पैरो से जमीं गवा बैठे

6 . सुकून आया उन्हें हमारी किश्ती को डूबता देख
वो साहिल पे इत्मिनान से खड़े सिर्फ मुस्कुराते रहे

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