खुश रहो…

जिन्दगी छोटी है पर हर पल में खुश रहना सीखो,,,

आज पनीर नहीं तो सिर्फ दाल खाके “खुश रहो”
आज दोस्तों का साथ नहीं तो टीवी देख कर “खुश रहो”
अपनों के घर जा नहीं सकते तो फोन करके भी “खुश रहो”
जिसको देख नहीं सकते उसकी आवाज़ सुनकर “खुश रहो”
जिसको पा नहीं सकते उसकी यादों से ही “खुश रहो”
बिता हुआ कल जा चूका है उसकी मीठी यादों में “खुश रहो”
गर आने वाले कल का पता नहीं सपनों में ही “खुश रहो”
हंसते-हंसते जिन्दगी यूँ ही बीत जायेगी बस हर पल में “खुश रहो”

नीलकमल वैष्णव”अनिश”