मनीप्लान्ट

लगाया है जब से मैने तुम्हे,
अपने आंगन के कोने में,
सींच रहा हूं तुम्हें, इस उम्मीद मे कि-
बदल दोगे,तुम अपने साथ एक दिन,
मेरी तकदीर भी.
लेकिन !
खाकर, तुम नित मेरा जलपान ,
बढते जा रहे हो .
और मेरी अतृप्त जिजीविषा को सदा के
लिये अपूर्ण छोडते जा रहे हो .

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