भारत की बेटी ने रखा

भारत की बेटी ने रखा
पहला कदम ससुराल में,
अगले कदम पर मौत के
मंजर निकल आए।
सँजोए थे ख्वाब कुछ
फूलों की सेज पर,
महकते फूलों से जब
खंजर निकल आए।
खोद रहे थे कब्र करने
दुश्मन को सुपुर्द-ए-खाक,
क्या पता कब से दफन
शव निकल आए?
पूरे जोश-ओ-खरोस पर
चल रही थी जंग,
बिन चली बंदूक के
अश्क निकल आए।

(आपरेशन विजय की परिस्थिति पर आधारित)

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