गीत- कृष्ण अब तुम गीत गाना छोड़ दो |

गीत

कृष्ण अब तुम गीत गाना छोड़ दो |
वांसुरी की धुन बजाना छोड़ दो ||

छीन ली जायेगी तेरी वांसुरी |
गोपियों की है प्रकृति अब आसुरी ||
है न अब द्वापर कि है कलयुग यहाँ |
राधिका को अब घुमाना छोड़ दो ||

गोपियाँ मगरूर है सारी यहाँ |
प्रेमिका ढूढ़ोगे तुम कैसे कहाँ ?
प्रियतमा कोई न तुमको चाहती |
रास लीला को दिखाना छोड़ दो ||

ढूध मिश्री और माखन है नही |
कोक पेप्सी और दारू बिक रही ||
बेंच वंशी को खरीदी जायेगी |
अब तो वृजबाला पटाना छोड़ दो ||

हाय वृन्दावन तेरा है कट गया |
माल होटल में वो यमुना तट गया ||
द्रौपदी निज वस्त्र क्लब में फेंकती |
द्रौपदी को अब बचाना छोड़ दो ||

आचार्य शिवप्रकाश अवस्थी
9412224548

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