शिक्षक (मुक्तक)

# शिक्षक #

पत्थर को तराश कर , कुंदन बना सकता है
माँ-बाप,भाई-बहन, दोस्त से लेकर गुरु तक
अलग-अलग रूपों में वो आकर राह दिखाता है
निस्वार्थ हो जीवन मैं वो ऐसा कुछ दे जाता है
लाखो की भीड़ में खड़ा कोई ‘शख्स’ जब अलग नजर आता है
करे निर्माण ऐसे मनुष्य का, वो ही सच्चा “शिक्षक” कहलाता है

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