अंधकार भविष्य

भविष्य कि अँधेरे में ही
आशा कि किरण पनपती है
दिये के निचे ही
अँधेरा होता है,
अँधेरों का अस्तित्व न होता तो
उजाला महत्वहीन होता,
आशा में ही भविष्य अंकुरित होता है
और
अंकुरित अँधेरों में होती है,
मात्रा पर बिचार किया जाए तो
बिष भी अमृत हो सकती है
और
मदिरा भी औषधि हो सकती है,
हीरा ढूढने के लिए
पत्थर तोडना पड़ता है
सोने कि पहिचान के लिए
आग में जलना पड़ता है,
सुरुवात जब भी शून्य से होती है
परिणाम भविष्य में होती है
और भविष्य
हर वक्त अंधकार में रहती है।

हरि पौडेल
नेदरल्याण्ड
३१-१०-२०१४

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