भूखा है हकदार तुम्हारा

खट-खट खट-खट निपट अकेला
साथ न उसके बुग्गी-ठेला,
करे सुरक्षा जिस छत नीचे
उसके नीचे झाम-झमेला।
फिर चलता फिर रुकता कर्मी
एक अकेला निर्बल कर्मी,
कह न सके वह दिल की बातें
कुड़-कुड़ कुड़ता जाए कर्मी।
अपना दुःखड़ा किसे सुनाए
पेट मसककर रोता जाए,
भूखा है हकदार तुम्हारा
बोल कहाँ से खाना आए?

मुकेश शर्मा
09910198419

2 Comments

  1. अरुण अग्रवाल अरुण जी अग्रवाल 30/10/2014
    • Mukesh Sharma Mukesh Sharma 31/10/2014

Leave a Reply