क्या लिखूँ

ऐ हुस्न-ए-कातिल, तेरी मचलती अदाओ की शान में क्या लिखूँ I
किसी चमन में खिलता सुर्ख गुलाब,या तेरे चहरे का रुआब लिखूँ I I

टूटा जो दर्पण होकर शर्मशार, इसे तेरी निगाँहों का वार लिखूँ I
इसे मै कत्लेआम कहुँ या तेरी शातिर नजरो का कमाल लिखूँ I I

तेरे गुजरने से चटकती है कलियाँ, क्या गुलशन का हाल लिखूँ I
इसे गुलो की आबरू कहुँ या तेरी मस्त अदाओ का बवाल लिखूँ I I

ठहर जाती है उफनती सागर की लहरे,क्या उनका सवाल लिखूँ I
करती है सजदे तेरे सत्कार में, या तेरी रवानी का तूफ़ान लिखूँ I I

बदल जाता है रुख हवाओ का,जिसे तेरी आहट का कमाल लिखूँ I
तेरी खुशबु का असर कहुँ इसे,या शोख अदाओ का धमाल लिखूँ I I

छुप-छुप के मध्य बादलो से ताकते चाँद का शर्माना आम लिखूँ I
उसे जन्नत की हूर कहुँ ,या जमी पे उतरता बरास्ता चाँद लिखूँ I I

### डी. के. निवातियाँ ###

2 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Anuj Tiwari"Indwar" 24/08/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 26/08/2015

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