पहेलियां

ख़त भी मेरा कलम भी मेरी
शिक्षा पर मेरा अधिकार,
मेरी कौन सी वस्तु नहीं तुम
हाथ उठाओ बरखुरदार?
(हाथ)

लड़की वही भोली दिखे
विवाह उपरांत निखरे रंग,
उस उमंग का नाम क्या
जिसे देख रह जाएं दंग?
(उमंग)

आस लगाए बैठी कब से
क्या करते मुझको याद नहीं,
ऐसा क्या है ख़त में मेरे
क्या दिल में तेरे आस नहीं?
(आस)

पागल हुआ जिसे देखकर
ऐ हसीना मुझे बता,
कौन थी वो स्वप्नपरी
ऐ हुस्नपरी मुझे बता?
(हुस्नपरी)

आसमान से थी चली
गति दिवाकर पर गतिमान,
बिजली जैसी तीव्रता
अरु विनाशक मेहमान।
(बिजली)

बुनकर मकसद मैं चला
कौन नगर कौन गांव,
उस मंजिल का नाम क्या
जहाँ ठहरे मेरे पाँव?
(मंजिल)

लम्बा कर तय रास्ता
हो भैंसे पर असवार,
उस लोक का नाम क्या
जहाँ म्रत्यु का अधिकार?
(म्रत्युलोक)

जिनके खोले जग खुले
जिनके बंद जग बंद,
ज्ञानी ज्ञान से बता
कहाँ नयनसुख आनन्द?
(नयन)

पत्थर मारे प्यार करे
करते जिसका नहीं गिला,
उस पागल का नाम क्या
जिसका नहीं सिला?
(पागल)

छम-छम पायल सी बजी
चली पिड़ुकिया चाल,
बता नवेली कौन वो
जाकी है ससुराल?
(नवेली)

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