तेरे कदम

निर्झर निर्झर
कोमल कोमल
पंख तुम्हारे
प्यारे हैं

तुम तूलिका
हो रंगों की
मोती अधरों पर
वारे हैं

घाट घाट पर
ज्योति सुशोभित
नयन नींद से
हारे हैं

समेट कर तुम
मोती आई
जगमग मेरे
घरद्वारे हैं

अठखेलियां करती
तेरी नादानियां
मासूम तेरे सारे
इशारे हैं

ओ बेटी तेरा
कृतधनी हूँ
जो तेरे कदम
घर पधारे हैं

2 Comments

  1. अरुण अग्रवाल अरुण जी अग्रवाल 31/10/2014
    • rakesh kumar rakesh kumar 03/11/2014

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