बचपन की यादें

आओ चलो एक बार फिर बचपन में खो जाये l
बचपन की उन शरारतों को फिर से हम दोहरायेll
अपनी सारी चिन्ताओ को दूर कही छोड़ आये l
आओ चलो एक बार फिर बचपन में खो जाये ll

भिनी-भिनी मिट्टी की खुश्बू चखने को है बुलाती l
डंडा लेकर दौड़ती माँ हमे याद बहुत है आती ll
फिर से चूल्ले की रोटी और लोनी घी खाये l
आओ चलो एक बार फिर बचपन में खो जाये ll

आज के विडियो गेम वो मजा ना दे पाये l
गिल्ली डंडा, खो-खो खेल खूब मजे आये ll
गाँव के पोखर में जाकर मजे से डुबकी लगाये l
आओ चलो एक बार फिर बचपन में खो जाये ll

भारी-भारी इन बेगो को कंधे ना अब उठाये l
फिर से एक बार तख्ती ले स्कूल हम जाये ll
बैल गाड़ी की सवारी कर, धुएं से बच जाये l
आओ चलो एक बार फिर बचपन में खो जाये ll

बारिश के आने पर आँगन में फिर हम नहाये l
कागज़ की हम नांव बनाकर हम खूब चलाये ll
छत पर चढ़कर मोर का हम नाच देख आये l
आओ चलो एक बार फिर बचपन में खो जाये ll

मदारी के इशारे पर बंदर का नाच नाचना l
वहीं भालू मामा का भी खूब फुदकते जाना ll
फिर से अपने गाँव में सर्कस का शो चल जाये l
आओ चलो एक बार फिर बचपन में खो जाये ll

ठंडी-ठंडी कुल्फी वाला जब भी घंटी बजाये l
सफ़ेद नीले रंग वाला बक्सा खूब याद आये ll
कुल्फी का मजा लिए बिना कोई ना रह पाये l
आओ चलो एक बार फिर बचपन में खो जाये ll

अंधकार के बड़ते ही छत पर सोने जाये l
सोच-सोच कर गगन में तारो से फोटो बनाये ll
माँ की प्यारी गोद में लोरी सुनकर सो जाये l
आओ चलो एक बार फिर बचपन में खो जाये ll

उस दुनिया में चिंता ना, कभी किसी सो सताये l
ईर्ष्या और बैर कभी ना पास किसी के आये ll
बहार से चाबी लगा के हम वहीं ठहर जाये l
आओ चलो एक बार फिर बचपन में खो जाये ll

One Response

  1. Anmol tiwari Anmol tiwari 31/10/2014

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