लड़का-लड़की एक समान

लड़का-लड़की दो अनमोल रतन है l
तो भेदभाव किस बात का
एक फूल की कली है भैया
दूजा फूल गुलाब का ll
दूजा फूल ………..

फिर लड़की के पैदा होने पर उदासी क्यों छा जाती है l
वही लड़का पैदा हो तो खुशी मनाई जाती है ll

लड़की का है क्या कसूर जो दुनिया देख न पाई l
एक लड़के की चाह में कन्या भूण हत्या करवाई ll

अलग ऱूप है अलग रंग है जान सभी में एक जैसी है l
फिर क्यों हमनें भेदभाव की खींची लकीर ऐसी है ll

लड़की करती है माँ बाप की सेवा,लड़का आँख दिखाएँ l
संभव है जब लड़के को संस्कार मिल न पाये ll

पूछो उनसे यह सवाल जिने बच्चें का सुख ना मिल पाएं l
एक बच्चें की चाह में उन्होने लाखों रूपए गवाएं ll

लड़का-लड़की का भेद मिटाकर, शिक्षा यदि दे पाओगे l
आसमान को छूने से ना इन बच्चों को रोक पाओगे ll

लड़का-लड़की दोनों से ही सृश्टि का चक्र चल पाता है l
बिना किसी एक के तो यह जीवन भी रूक जाता है ll

माँ,बहन, बेटी के ऱूप में लड़की ने कई फ़र्ज़ निभाएं l
वहीं लड़का पिता, भाई और बेटे के ऱूप में आये ll

आओ मिलकर प्रण करे की भेदभाव अब कभी ना होगा l
शिक्षा व अधिकार पर दोनों का समान हक़ होगा ll

3 Comments

  1. अरुण अग्रवाल अरुण जी अग्रवाल 31/10/2014
  2. निशान्त पन्त "निशु" निशान्त पन्त "निशु" 18/04/2015
    • Rajeev Gupta Rajeev Gupta 18/04/2015

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