तेरे प्यार में मोटीयार कवि विनय भा र त

क्यूँ इस कदर हमसे नाराज़ होती हो

क्यूँ हमे रुलाकर यार तुम सर्कार होती हो

हम तो पहले से ही यार तुम्हारे थे तुम्हारे हैं

हमे यूँ कसमे खिलाकर और मोटा यार करती हो

कवी भारत