तेरे ही ख्याल

तेरे ही ख्याल से क्यों ?
शुरू होती है जिन्दगी
शाम होते – होते क्यों ?
तनहा हो जाती है जिंदगी
बिखर गए जो मोती
संभाल क्यों ?
नहीं पाती है जिंदगी
उजड़ गयी हर बस्ती याहं
फिर रेत के घरोन्दे क्यों?
बनाती है जिंदगी
हाथ पकड़ कर दूर छोड़ आये जो
उन्हें ही हमसफ़र क्यों ?
बनाती है जिंदगी
अश्कों के इस मौसम में
“बंधू” क्यों ? फिर से
मुस्कराती है जिंदगी
“देशबन्धु” टी. जी. टी. (आर्ट्स) हिमाचल शिक्षा विभाग

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  1. Ajay Kumar Ajay Kumar 28/10/2014

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