‘विकि दान-दानवीर’

दान वीर दान कर, दीनता धरा की है। कदकंचन समानमंगल,हो अकिंचन जन काज।। दवा – दया दूबरी,दूब सो जीवन साज। तारक उद्धारक अवनि,अवलोकि विचारक राज।। वारिद बहावत बहुदा,लुटावत अलौकिक જ્ઞાन। जाको फल चाखी तात,भूमि भार उतार्यो मान।। सोभा के निधान अति, अनुकूल विधान ठान। इतै अलबेली अलाप कटै,सुलेख कीजै दान।। ऐसो मीडिया लायो गुन,खानि विकि बन्योमहान। बढ़ायो सीतलता जग जानि,आभा चहुँओर ध्यान।।
:-वारिद-वादल।जाको-जिसका।सोभा-शोभा।लायो-लाया।बढ़ायो-बढ़ाना,प्रगति।

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