‘नौ जवान गीत सुना दो!’

भारत की तकदीर सजा दो,नौ जवान एक गीत सुना दो! आये चट्टान बीच डगर में,बढ़ आगे तुम उसे हटा दो।। दूध की ताकत माँ का खून,जा दुश्मन को आज चखा दो। बन चमकोगे अमन का तारा,दुनिया को जा राह दिखादो।।भारत की—2।। साबरमती न सिसके तेरी,मानवता का पाठ पढ़ा दो। राम-राज की सही हौ कल्पना,जनजन को जाकर सिखला दो।। हिमालय की चोटी ऊँची से,कौमी एकता का पाठ पढ़ा दो। वीर सभ्यता का देश हमारा,हिन्दुस्तान कह इंशा जगा दो।।भारत की—2।। जमीं और आकाश पर बोलो़, शिवा का भगवा फिर लहरा दो। मन सीता सा बचन गीता का,जहाँ में बढ़कर गीत सुना दो।। नफरत की लाठी को तोड़ो,सद्भाव -प्रेम का विगुल बजा दो। सच की मंजिल अपनी सारी,खतरों को डट समूल मिटा दो।।भारत की—2।। दुनियाँ की आँखो का तारा, गाँधी- तिलक- सुभाष बता दो। सुख समृद्दि लिए वतन हमारा,गोकुल-गुलमर्ग चमन दिखादो।। दाएँ हर्षित कर लेकर तिरंगा,विश्व- शान्ति का पाठ पढ़ा दो। मीठी बोली हमारी हिन्दी,दीवानों – दीवाना बना दो।।भारत की—2।। उर्दू मेरी बहन नन्हकौ है,अंग्रेजी को लो જ્ઞાन करा दो। भारत की तकदीर सजा दो,सद्भाव -प्रेम का विगुल बजा दो।। कौमी एकता का पाठ पढ़ा दो,जनजन को जाकर सिखला दो। मानवता का पाठ पढ़ा दो,विश्व- शान्ति का पाठ पढ़ा दो।।भारत की—2।।

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