पहेलियाँ ज़िन्दगी की

कई पहेलियों से कम नहीं जिंदगी होती है,
एक सुलझाओ तो दूसरी आड़े खड़ी होती है,
मुझे लगा था मैंने समझ लिया फ़लसफा इसका,
पर फिर पता चला, यूँ ही नहीं ये हल होती है|

बनके बंजारा जब चला मैं निपटने इससे,
आया समझ कि नहीं ये किसी कि दिलरुबा होती है,
हाँ ये बात अलग है कि अगर न करो कोशिश समझने कि,
तब तो ये तुमपे हर पल, हर कदम फ़िदा होती है|

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