“मुक्तक”

दोस्ती इस जहाँ में है सब से बड़ी,
है ये मुझ से बड़ी, है ये तुम से बड़ी,
है यही बस दुआ दोस्ती के लिये,
ये सलामत रहे ज़िन्दगी में मेरी ।

दोस्ती ये हमारी कभी कम ना हो,
तुम रहो ना रहो, हम रहें ना रहें,
दोस्ती से ना पहचान अपनी बने,
यार, हम दोस्ती को एक पहचान दें ।

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ये शायरी नहीं मेरे दिल का सुकून है,
इंसानियत से नम मेरे दिल का ये खून है ।

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ज़माने ने देखो किया क्या तमाशा
तमाशाई भी हम तमाशा भी हम हैं ।

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वो कश्ती में मेरी बनाके सुराख़
पूछते हैं की हमसे ख़ता क्या हुई ।

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ज़र्रा ज़र्रा इस ज़मीं का जोगियों से कह रहा
जो है तेरा ये वतन, वो ही चमन अपना भी है ।

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मास जनवरी दिन शनि, उन्यासी था वर्ष ।
अग्र दिवस छब्बीस को, जीवन का उत्कर्ष ।।

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नव वर्ष सदा ही आता है,
गत वर्ष चला भी जाता है,
पर जाते-जाते भी हमको,
कुछ यादें देकर जाता है ।

कुछ मीठी कुछ खट्टी यादें,
कुछ रोती कुछ हंसती यादें,
कुछ सुलझी-अनसुलझी यादें,
हाँ यादें देकर जाता है ।

बीती यादों की आभा तुम,
जीवन को आलोकित कर दो,
है मेरी शुभकामना यही,
नव वर्ष तुम्हें मंगलमय हो ।

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नव वर्ष तुम्हारे जीवन में,
सौंदर्य नया सा इक भर दे ।
यह वर्ष तुम्हारे मानस के,
दीपों को आलोकित कर दे ।

सपनों की इस रंगोली को,
रंगीन रंगों से यह कर दे ।
है मेरी शुभकामना यही,
नव वर्ष तुम्हें खुशियाँ ही दे ।

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ऊपर जो है भगवान बसा,
वो हमें सहारा देता है ।
है देर मगर अंधेर नहीं,
ये ही जग सारा कहता है ।

रवि ढलता तो उगता भी है,
सब समय बराबर रहता है ।
ग़म हैं ग़र तो खुशियाँ भी हैं,
दुःख पर सुख आता रहता है ।

सब अँधेरे छंट जायेंगे,
इस वर्ष मेरा दिल कहता है ।
जो हार कभी भी ना माना,
हर जंग वही तो जीता है ।

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आदमी ज़िन्दगी को जान पाया नहीं
क्या बताऊं कि मैं भी तो इंसान हूँ ।

– हिमांशु

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