“ज़िन्दगी”

ग़म हैं या ख़ुशी है,
ये तो ज़िन्दगी है ।
छोटी-छोटी खुशियाँ हैं,
प्यारे-प्यारे वादे हैं,
दिल में कुछ उमंगें हैं,
मन में कुछ इरादे हैं ।
यहाँ पर, प्यार भी है,
ये भी ज़िन्दगी है ।
ग़म हैं या ख़ुशी है,
ये तो ज़िन्दगी है ।
लम्बी-लम्बी रातें हैं,
जलते लोग जाते हैं,
ग़म के गहरे सागर में,
देखो डूब जाते हैं ।
प्यार तो, ये भी है,
ये भी ज़िन्दगी है ।
ग़म हैं या ख़ुशी है,
ये तो ज़िन्दगी है ।
जहां में लोग आते हैं,
आके चले जाते हैं,
कुछ तो याद रहते हैं,
बाकी भूल जाते हैं ।
यारों, सच तो यही है,
ये ही ज़िन्दगी है ।
ग़म हैं या ख़ुशी है,
ये तो ज़िन्दगी है ।

– हिमांशु

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