“कुछ यादें”

इक रोज़ इक नज़ारा मेरी ज़िन्दगी में आया I
मैं जानता नहीं था क्या वो अपने साथ लाया I
मेरी ज़िन्दगी के उसने सारे तार छेड़ डाले,
सातों सुरों में उसने सुन्दर एक गीत गाया I
जीवन का अर्थ क्या है, यह तब समझ में पाया I
इक रोज़ इक नज़ारा मेरी ज़िन्दगी में आया I

इंसान तो नहीं था, था वो कोई फ़रिश्ता I
या फिर कोई दुआ थी जो वो मेरे पास आया I
जो कुछ भी वो रहा हो – इंसान या फ़रिश्ता,
किस्मत से ही तो मेरे जीवन में था वो आया I
सारी क़ायनात के वो, जलवे था लेके आया I
इक रोज़ इक नज़ारा मेरी ज़िन्दगी में आया I

तक़दीर पर हमेशा, कहाँ एक सी है रहती ?
मुझसे जुदा हुआ वो, इक ऐसा दिन भी आया I
उस दिन तो थी क़यामत, तूफां भी सांस में था I
आँखें भी नम थीं मेरी, वो देख़ नहीं पाया I
खुशियों का अंत ग़म हैं, ये तब समझ में पाया I
इक रोज़ इक नज़ारा मेरी ज़िन्दगी में आया I

– हिमांशु

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