लगता मैं स्कुल गया

तमस मेरा धुल गया, लगता मैं स्कुल गया
मनस मेरा घुल गया, लगता मैं स्कुल गया

समन मेरा खुल गया, लगता मैं स्कुल गया
गमन मेरा भुल गया, लगता मैं स्कुल गया

सनम मेरा झुल गया, लगता मैं स्कुल गया
जनम मेरा तुल गया, लगता मैं स्कुल गया

रचनाकार/कवि~ डॉ. रविपाल भारशंकर
(९८९००५९५२१)

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