एक याद

बाबुल जब मैं पैदा हुई
दुनिया इस ने सब ने
ताने मुझे तुमहे मारे !

देख यह सब मैं घबराई
बीएस एक तुम ने पापा
मुझे परी अपनी तब कहा था !

बाबुल जब मैं तीन वर्ष की हुई
तब नाम मेरा आप ने
गांव के एक विधालय मैं लिखवाया !

बाबुल जब मैं आठ वर्ष की हुई
तब आप मेरा मीत साईकिल लाये
साईकिल वो चलना वो सब
मैंने आप से ही सीखा था !

पिता जी जब मैं मैट्रिक मैं
सर्वप्रथम आई थी , गांव पुरे में
तब आप ने मिठाई बाँटि थी !

पिता जी जब में शिक्षक बनी
मुझे छोटा सा विधालय
आप ने ही तो बना कर दिया था !

जब मेरी डोली सजी थी बाबुल जी
तब आप मैं खूब मन में रोये थे
मुझे आने का वादा कर ,
आप ने ही पिता जी मुझे विदा किय था !

– हरमीत शर्मा कवि

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