गजल -जरा यार तुम मुस्कुरा के तो देखो |

जरा यार तुम मुस्कुरा के तो देखो |
कभी अपने गम को भुला के तो देखो ||

हवा ए जो गर्दिश बहे बन के तूफां |
समां हौसले का जला के तो देखो ||

ये कट जायेगीं गर्दिशे गम की राते |
कभी सूर्य को तुम उगा के तो देखो ||

बनाना अगर खूबसूरत जमीं है |
तो तारों को धरती पे ला के तो देखो ||

ये दुनिया की औकात है कितनी छोटी |
कभी आसमाँ को झुका के तो देखो ||

बुलंदी सभी तेरे क़दमों में होंगी |
जरा सा कदम को बढ़ा के तो देखो ||

आचार्य शिवप्रकाश अवस्थी

समंदर अगर राह रोके तुम्हारी |
तो तुम राम सेतू बना के तो देखो ||

डगर पर खडी मौत हो ले के खंजर |
तो तुम मौत को आजमां के तो देखो ||

बताता है शिव तुम सभी भर्त वंशी |
पकड़ शेर को मुह खुला के तो देखो ||

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