गजल -इरादे पाक के नापाक हैं ये हम जानते हैं |

हमारी जान भी जाए तो हम कश्मीर ना देंगे |
जमीं का स्वर्ग है मेरा कि ये तस्वीर ना देंगें ||

इरादे पाक के नापाक हैं ये हम जानते हैं |
करें घुसपैठ ये कितनी मगर जागीर ना देंगें ||

हजारों कारगिल सी जंग हो तो भी नहीं चिंता |
मुकद्दर है मेरा कश्मीर ये तकदीर ना दंगें ||

नहीं मोहताज है भारत किन्हीं मुल्कों की रहमों का |
इरादे बन चुके शमशीर वो शमशीर ना देंगें ||

कभी भी हम नहीं हारे न तुमसे हार सकते है |
करन के पांच बाणों की वो हम तुणीर ना देंगें ||

पिलाया ढूध तुमको आज तक उगले गरल तुम हो |
प्रकट श्री राम होते है कि हम वो खीर ना देंगें ||

बहुत समझा चूका है शिब मगर समझे नहीं हो तुम |
तुम्हे जो बाँध सकती है वो हम जंजीर ना देंगे ||

आचार्य शिवप्रकाश अवस्थी

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  1. अरुण अग्रवाल अरुण जी अग्रवाल 27/10/2014

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