निज शिष्या के बाल

1-.
चमचा पूरा देश अरु
चमची प्रजा महान।
अपना ही घर लूटते
चोर,भ्रष्ट,बेईमान॥

2-
जिसको चाहें लुट लें
देकर घूंस जनाब।
हाथ जोड़कर चल पड़ें
छापें ह्रदय घाव॥

3-
सी0एम0बनकर धर रहे
डी0एम0पर ही धार।
अरु प्रजा पर पड़ रही
महँगाई की मार॥

4-
घोटाला दो करोड़ का
चार करोड़ की जाँच।
दामन पर ना आ रही
इन भ्रष्टों के आँच॥

5-
इनके वचन-प्रवचन की
चर्चा हो गई आम।
राम-क्रष्ण का नाम ले
जाएँ वैश्या के धाम॥

6-
इनका ऐसा राज है
जामें शोषण ताल।
अध्यापक ही खींचते
निज शिष्या के बाल॥

(प्रोफेसर मटुकलाल-जूली प्रकरण)

7-
आँसू पत्नी के गिरें
माशुक मारे मौज।
माइक लेकर मीडिया
खबर दिखावै रोज॥

8-
मानव खुद ही बेचता
जिव्हा खिंची शराब।
चढ़े नशा तब डोलती
बन कालिख मुख आब॥

9-
न्यायालय खामोश अरु
दर पर मरें मुरीद।
बैरिस्टर की गपोलियां
ले आओ चश्मदीद॥

10-
पढ़कर लिखकर क्या किया
जोतेँ अपना खेत।
अनपढ़ संसद में मिलें
कलम चले ना देश॥

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