अनुभव ही हैं ज्ञानी

।।अनुभव ही है ज्ञानी।।

एक बार धुधले कुहरे में
इक तोता अंजाना
आसमान मे भटक गया था
बहुत पड़ा पछाताना
जब से भटका
लगा है झटका
ढूंढ रहा था पानी ।।
अनुभव ही हैं ज्ञानी ।।1।।

बहुत देर से सोच रहा था
कहा करू विश्राम
एक वॄक्ष पर आकर रुकता
हो जाती हैं शाम
था इक खोढर
लगता था डर
हो सकती थी हानी ।।
अनुभव ही है ज्ञानी।।2।।

बहुत पुराना वह खोढर था
आकर वह छिप जाता
कालिख मे काला हो जाता
पता नहीं वह पाता
डर के मारे
बिना सहारे
पर रुकने की ठानी ।।
अनुभव ही है ज्ञानी ।।3।।

रहता था इक काला कौआ
उस खोढर के अन्दर
चला आ रहा दाने चुनकर
गावों से अपने घर
जैसे आया
कुछ घबडाया
पाया अलग निशानी ।।
अनुभव ही हैं ज्ञानी ।।4।।

आहट पाकर असमंजस मे
दरवाजे तक आया
थोड़ा सा भयभीत हुआ पर
काँव कांव चिल्लाया
उडके झट से
इक झुरमट से
किया एक नादानी ।।
अनुभव ही हैं ज्ञानी ।।5।।

चोच मे भरकर वह इक कंकड़
उस खोडर के पास
आता और डालने का फिर
करने लगा प्रयास
इक दो कंकड़
छोड़ा बढक़र
पर हुई नहीं आसानी ।।
अनुभव ही है ज्ञानी ।।6।।

फिर कौऐ ने काँव काँव कर
ज्यों ही चोंच बढाया
अवसर पाकर उस तोते ने
चोंच पकड़ मकनाया
टोट मे टोटा
खुब खरबोटा
मची थी खींचातानी ।।
अनुभव ही हैं ज्ञानी ।।7।।

छुटा छुटी मे भागमभागी
कौआ डर के मारे
भाग रहा था उसके पीछे
तोता पाँव पसारे
इक था आगे
सरपट भागे
हुई बहुत परेशानी ।।
अनुभव ही है ज्ञानी।।8।।

और अचानक इक झाड़ी मे
फँस जाते घबड़ाकर
दिख जाता है झुन्ड वहाँपर
तोतों का नियराकर
आहे भरके
सब मिलकरके
मदद किये हर्षानी ।।
अनुभव ही हैं ज्ञानी ।।9।।

तब कौऐ ने कहीं सभी से
एक राज की बात
उस कोटर मे रहते थे
कटफोडवा के तात
गये वे घर से
उन्हीं के डर
थी खोढर की राज कहानी ।।
अनुभव ही हैं ज्ञानी ।।।10।।

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2 Comments

  1. अरुण अग्रवाल अरुण जी अग्रवाल 24/10/2014
  2. रकमिश सुल्तानपुरी राम केश मिश्र 09/11/2014

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