“तुझे मारने वाले”

तुझे मारने वाले
बाईज़्ज़त बरी हो गये हैं
हरिजनों के, तेरे
वे अब हरि हो गये हैं
लोग हुकूमत, दे रहें हैं
उनकी हाथों में खुशीसे
खुल्लमखुल्ला देस में
वे अब चरी हो गये हैं
और तु तो कहता
अल्ला-ईश्वर नाम है उसीके
बाबरी गीरानेवाले
लेकिन “श्री” हो गये हैं
और मनमानी पे उतर आए हैं
तेरे भी वारीसदार
खद्दरधारीवाले सारे जरी हो गये हैं
तुझे मारने वाले
बाईज़्ज़त बरी हो गये हैं

रचनाकार/कवि~ डॉ. रविपाल भारशंकर
(९८९००५९५२१)