मुक्तक

मुक्तक

बहुत जल्दी मिलन होगा गिनों तुम दिन न ज्यादा है |
दिखा कवि शक्ति को दूंगा ये शिव शायर का वादा है ||
तमाशा मै बना अब तक बनोगी अब तमाशा तुम |
क्रिया की प्रतिक्रिया होती ये उत्तर सीधा सादा है ||

संदेसा से दिया तुमको न हम धोखा कभी करते |
विजय पथ के पुजारी हम नहीं हम मौत से डरते ||
त्रिलोकी को झुकाने का नशा रखते है कवि शायर |
प्रथम तुमने अनीती की तो अब हुंकार हम भरते ||

असीमित शक्ति है मुझमे न शक्तीहीन समझो तुम |
सिखाती ज्ञान कुदरत है न मूरख दीन समझो तुम ||
प्रथम कवि ने सिया के भी सुतों को शक्ति दे दी थी |
सभी हारे अवध वासी न कवि को छीन समझो तुम ||

बहुत विस्फोटकारी मोड़ में कविता हमारी है |
विकल है रागिनी दिल की व्यथा आत्मा पे भारी है ||
मुहब्बत हो गयी असली न कविता से ये रुक सकती |
निकल लेगी रूह अब तो न मुझको जान प्यारी है ||

अमर कवि प्यार में तेरे अमर हो के जो मर जाए ?
उसे पापी कहोगी क्या ?तड़प करके जो मर जाए ?
बुला लो अब मुरारी को परीक्षण प्रेम का ले लो ?
न तुम कीमत चुका सकती मुहब्बत में जो मर जाए ?

आचार्य शिवप्रकाश अवस्थी

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