ऐसे कब तक (कविता)

।। ऐसे कब तक।। (कविता)

उम्मीदें अब टूटेगी कि
प्यार का दीपक जल पायेगा
मै बोलू तुम शान्त रहोगे
ऐसे कब तक चल पायेगा ।।

झीलों सी तेरी आँखों मे
एक बार ही तैर सकू मै
बनकर मछली तेरे दिल मे
या यादों में  सैर करू मै
थोड़ा सा साहस पाकरके
प्रेम हमारा पल पायेगा ।।
मै बोलू तुम शान्त रहोगे
ऐसे कब तक चल पायेगा ।।2।।

एक बार तुम करके देखो
थोड़ा सा संकेत
दिल की सारी बात कहूंगा
तनिक न होगी लेट
आखिर देर करोगे कैसे
प्रेम घडा यह भर पायेगा ।।
मै बोलू तुम शान्त रहोगे
ऐसे कब तक चल पायेगा ।।3।।

न आहे हैं ,न राहे है,
न कोई एक निशानी
चाह रह हू उन होठों पर
रच दू प्रेम कहानी
आशाओं का मेरा सूरज
काश! कभी न ढल पायेगा ।।
मै बोलू तुम शान्त रहोगे
ऐसे कब तक चल पायेगा ।।4।।

जाने दो अब मै भी तुमसे
नही करूंगा बात
हार गया हूँ संकेतों का
करके मै बरसात
बिना तुम्हारे उकसाने पर
प्रेम दीप न जल पायेगा ।।
मै बोलू तुम शान्त रहोगे
ऐसे कब तक चल पायेगा ।।5।।

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