दस्तूर दुनिया के

दस्तूर अज़ब हैं दुनिया के, ऊँगली पे सबको नचाते हैं,
सब गलत, कुछ सही नहीं, हमपे ये जतलाते हैं।

शमशीर उठा कर जज्बे का, घनघोर करो जो विरोध कभी,
कहके पागल, या बाग़ी, तुमको फिर झुठ्लाते हैं।

ना विचलित हो, ना डरो कभी, दुनिया का क्या है, क्षणभंगुर,
देखो कैसे फिर तुम्हारी शौर्य कथा, नहीं अगली पीढ़ी को सुनाते हैं।

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