तो क्या बात होगी

फैला देना राख मेरी खेतों में मरने के बाद,
सोना बनके खेतों में लहलहाउंगा तो क्या बात होगी,

मरके भी अमर हो जाऊंगा गेंहू की बालियों में,
अगर किसी गरीब का निवाला बन जाऊंगा तो क्या बात होगी।

किसी अंधे की ज़िन्दगी में भर देना रौशनी,
उसकी आँखों से आगे भी दुनिया देख पाउँगा, तो क्या बात होगी।

किसी लाचार को अगर हो ज़रूरत तो दे देना दिल मेरा,
किसी के सीने में फिर से धड़क पाउँगा तो क्या बात होगी।

और न हुआ कुछ तो कम से कम मेरी देह को रख देना खुले मैदान में,
कुछ भूखे गिद्धों का पेट भर पाउँगा, तो क्या बात होगी।

ऐसे या वैसे, जैसे भी सही,
मरके भी अगर किसी काम आ पाउँगा तो क्या बात होगी।

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