तुम भी थे

क़त्ल हुआ अरमानों का मेरे, गवाह तुम भी थे,
कुछ अरमानों के टूटने की, वजह तुम भी थे,
छोटी छोटी ख्वाहिशें मेरी, जुगनू के जैसे,
उन ख्वाहिशों में से एक ख्वाहिश, तुम भी थे।

नहीं मज़बूर मैं और न ही तुम थे कभी,
अपने रुआब में मगरूर मैं, और ज़रूर तुम भी थे,
न की कोई ख्वाहिश जब से दिल टूटा है अबकी,
टूटे दिल के टुकडों में थे ख्वाब, कुछ टुकड़ों में तुम भी थे।

Leave a Reply