साधना

देखा मैंने एक रोज;
बहुत से जन
मिलकर बनाने लगे गण
गण बना, गणाधिपति बने
टटोलने लगे एक दूजे का मन
नहीं मिला !
करने लगे वशीकरण
बोलने लगे मंत्र
अपनी ओर मिलाने को !
दिखाने लगे इंद्रजाल
खुशहाली का, आजादी का
इंद्रजाल कभी झूठा नहीं होता ?
पूर्ण हुई कामना
सफल हुई साधना
खोजी गई भैरवी
बाकी था तंत्र
करके शराब, शबाब, कबाब का
आचमन,
प्रसन्न हुए कुर्सिनन्द
दे दी पूर्णाहुती
बनकर अधिनायक
जन, गण, मन की।।

अजीत चारण
मो. 9509713798

3 Comments

  1. Vimal Kumar Shukla Vimal Kumar Shukla 19/10/2014
    • manoj charan manoj charan 19/10/2014
  2. जितेन्द्र जितेन्द्र 20/10/2014

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