दर्द वही हे

सीने मे दिल, होठो पे नाम वही है।
आंखो मे शख्स, सांसो मे इंतजार वही है।
अक्सर मजबुर हुवा करती थी वो,
मुझसे नजरे फेरने में…….
देखलो उनकी आंखो में इनकार वही है।

में मेरी ख्वायीशे, मेरे मोहोब्बत का गुरुर वही है।
आज भी नजरे मिलाने से मगरुर वही है।
यु ही ऊंगलीया उठती हे मुझपे…..,
शायद मेरे कातील की ख्वायीश, और
इस दीवाने पे इल्जाम वही है।

शाम हो गयी इसी एहेसास में
अब तु मेरा दिदार करेगी…..,
पर नाकामयाब मोहोब्बत का अंजाम वही हे।

तेरे लिये मेरे दिल मे जगह….. और….
मेरे जेहेन में तेरे लिये खयाल वही हे।
खुले आंखो से तेरा दिदार कर के भी
मेरे टुटे दिल का मुकाम वही हे…..।

**** संदीप जगताप

2 Comments

  1. Sandeep Singh "Nazar" 19/10/2014
    • Sandeep Jagtap Sandeep Jagtap 20/10/2014

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