‘व्यंग रचना’


तबतक दिक्कत देवी को; जबतक सौहर रहता घर। सौहर जब बाहर गया? सोती देवी दो पहर। बेड पर चाय पीने को, बना के लाये कलर्क। किया काल जब कहीं से, देवी बोलतीं फराफर, कभी कहां सोने देते, रहते हो जब तुम हो घर॥

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  1. अरुण अग्रवाल अरुण जी अग्रवाल 18/10/2014

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