नशा हैं तुम्हारा

जो हमपर छा गया है वो नशा है तुम्हारा
तुमने ही गहरा किया है हल्का सा नजारा

तुमने किताबो में पढ़ी होगी ये बाते
हम ने धड़कनो से लिखे हैं इरादे
इरादे तुमपर आ गये यही तो है जीयरा
तुमने ही गहरा किया है हल्का सा नजारा

इक बार या सौ बार हालत यही हर बार
हर बार मुहब्बत में तरसाते हैं दीदार
दीदार हमको तेरे, तुमको मेरे हो दोबारा
तुमने ही गहरा किया है हल्का सा नजारा

किस्मत की बाते तो होगी ही किस्मत में
हमने चंद अल्फाजो से नवाजा है उल्फत में
उल्फत में तु है मेरी जैसे राख में अंगारा
तुमने ही गहरा किया है हल्का सा नजारा

रचनाकार/कवि~ डॉ. रविपाल भारशंकर (९८९००५९५२१)