दिल में तुम्हें रखा हैं

दिल में तुम्हे रखा हैं ऐसे जैसै राज
कोई न जाने तु भी न जाने, जो चाहे आ जाए आँच

कोई चुराए दौलत ही मेरी
किंमत लगाकर शोहरत ही मेरी
जुदा कोई कर ना सकेगा ये दामन
तु जो समाई हैं साँसो में मेरी
मैंने वफ़ा का सिरपे तेरे रखा है सिंदूरी ताज

दिल तोड़ने वाले लाखों हैं
दिल जोड़ने वाला कोई नहीं
दस्तूर जमाने का है सितम
पर तुमसे प्यारा कोई नहीं
तेरे मेरे बीच ना रह जाए कोई दूरी आज

मन से मन मिल जाता है
तो कहते हैं, पावन है मिलन
जीवन से ये वादा है
दे जाऊँगा मैं अपनापन
मैंने प्यार किया है, कोई चोरी नहीं जो लागे लाज

रचनाकार/कवि~ डॉ. रविपाल भारशंकर
(९८९००५९५२१)