मुझे बहकने दे

1-
मुझे बहकने दे
रौनके-बहार में साकी,
तू न बहक वर्ना
मैं बहक जाऊँगा,
बहकने पर तेरे
कहर छा जाएगा,
मैं तो कहर का भी
सामना कर जाऊँगा।

2-
खातिर अपनी कद्र
वफ़ा करता हूँ,
आदमी हूँ आदमियत से
वफ़ा करता हूँ,
भला हो गैर का
क्या बुरा मुझको,
इश्क में खुदा के
इजाफा करता हूँ।

3-
गर बदल भी दे
खुदा फैसला अपना,
कब बदलेगा आदमी
जुबां अपनी,
क्या यकीं ऐ जमाने
सितमगर का यूँ भी,
जिसने न रखी जमीं पे
कमां अपनी।

4-
हुकूमते-हुक्मरां का
हुक्म है यारब,
सिपाही क्यूँ मगर
बदनाम है यारब,
जां उसकी हथेली पे
ईमां कैद में उनकी,
वफ़ा ओ बेवफ़ा का
अनोखा मेल है यारब।

5-
क्यों कहता नहीं आदमी से
आदमी का मन,
बांधता खुरशीद से है
कौन फिर कफ़न,
मयस्सर हर जगह है
इबादत आदमी की,
मयस्सर नहीं आदमी को
आखिरी वतन।

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