“चुड़ैल की अम्मा”

एक दिन सवेरे, घर से निकलते ही ,
हमारे पूज्य पडोसी जी की श्रीमती ने हमको टोका, बिना बात के बेमतलब रोका |
हर दिन बिन सुर के बजता उनका साज़ है,
सब मोहल्ले का स्टेटस लेना , ये उनका स्पेशल अंदाज़ है ||
बिना उनकी टोकन के कहाँ मोहल्ले वालो का दिन निकलता है ,
उनके इसी खौफ से हमारा दिल भी दहलता है ||
हमारी नयी टाई को देख के वो बोली,
आज चमक के कहाँ चल दिए |
मैंने कहा -आज ऑफिस में प्रेजेंटेशन है उसी के लिए डाली है ,
मन में सोचा , हो गया बंटाधार कैसी काली बिल्ली घर के पास पाली है |
उनकी और उनकी बेटी की हरकते एक समान है ,
उन दोनों को बनाने वाला ऊपर वाला भी महान है |
उनकी बेटी का नाम ललिता है जो फिल्मो की ललिता पवार से कम नहीं है |
१०० पे भारी पड़ती है , किसी चुड़ैल से कम नहीं है ||
पूरे कॉलोनी वालो का हंसी का फौवारा छूट पड़ता है |
जब उनकी सासू माँ का छुटियो में आने का मुहूर्त पड़ता है ||
सुबह से शाम तक तीन शब्दों का मधुर उच्चारण होता है,
जिसे सुनकर हर प्रताड़ित मोहल्ले वाले का दिल बाग़-बाग़ होता है |
उनकी सासु माँ हर बात में साबित करती है उनको एक दम निकम्मा ,
बस यही आवाज़ आती है , कहाँ मर गयी “चुड़ैल की अम्मा” ||

— कवि कौशिक (Arpit Kaushik), R&D engineer

8 Comments

  1. Vimal Kumar Shukla Vimal Kumar Shukla 22/10/2014
    • arpit kaushik 24/10/2014
  2. अरुण अग्रवाल अरुण जी अग्रवाल 24/10/2014
  3. Anmol tiwari Anmol tiwari 24/10/2014
    • arpit kaushik 24/10/2014
  4. डॉ. रविपाल भारशंकर डॉ. रविपाल भारशंकर 25/10/2014
  5. आनन्द कुमार दोहरे 02/11/2014
  6. कवि अर्पित कौशिक 07/12/2014

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