नेता

नेता आज का , बड़ा खराब
अपनी सोचता , देश को बेचता
थोड़ा सा ही नहीं , कुछ भी नहीं करता
सच्चे कार्य छोड़ , बुरे करता

नेता ते तो थे , महात्मा गांधी जैसे
अपने बारे नहीं , देश बारे सोचते थे
थोड़ा सा ही नहीं , कहीं ज्यादा करते थे
बुरे कार्य छोड़ , नेक काम करते थे

आज तू , पकड़ता हर सिक्का
स्वदेशी छोड़ , परदेसी तू हो गया
इंसान से तू , दानव बन
अछे से , तू बुरा बन गया

दिल नहीं तुम्हारा , पत्थर है शायद
आँखे नहीं तेरी , कौड़ियां है शायद
कान नहीं लगते , बंद पर्दे है
अपनों की चीख पुकार , तुझे दिखती सुनती नहीं

दोस्त नहीं तुम , दुश्मन है तू
अपनों को ही तू , हमे अनदेखा करता
नेकी छोड़ , बुराई कर रहा तू

आज तू रंग बदलता
पल भर में कुछ
पल में कुछ
नेता गिरगिट बनता

– हरमीत शर्मा कवि

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