जाने तु और जानू मैं

जाने तु और जानू मैं, जानू मैं और जाने तु
एक लगाव हल्का सा, मन ही मन बहाव सा

तेरी मेरी दूरीयों में, अपनेपन का साया था
मंद मंद अँखियों में, लगाव सा समाया था
आस पास रहने को क्यूँ, जीया जीया तरासाया था
जाने तु और जानू मैं, जानू मैं और जाने तु

एक पुकार हल्की सी मेरी आह में बनी
मेरे मन की नमी तेरी चाह ने सुनी
क्या कहा था मैने जो तु मुस्कुरा गयी
जाने तु और जानू मैं, जानू मैं और जाने तु

लब लबा लब, डब डबा डब, तेरा मेरा हाल-ए-दिल
मिल गये दिल, दिल गये मिल, प्यार हो गया आखिर
जाने तु और जानू मैं, जानू मैं और जाने तु

रचनाकार/कवि~ डॉ. रविपाल भारशंकर
(९८९००५९५२१)