स्वप्न में ही मोहें प्रभु के संग अभिनय करे दे

ओ री! बांवरी बयारिया सुन इक मोरी बतिया
सूनी मन की नगरिया, बीते दिन नाहीं रतिया
पल-पल मोरे नैंन विरह के कोमल गीत गायें
सुहावन सुबह न लागे, मनभावन मन के न भावे
तू जब इधर चली आवत याद के चुनरिया ओढ़े
बिन बसंत मन में पीर-पुष्प खिल-खिल जायें
कभी दिन रहे तोरे संग उड़ चले के जियरा करे
अब तोरे छूते ही मृत तन में कहर के लहर उठे
सुरीले सुर संध्या में आज गुनगुना, मोहें सुला ले
स्वप्न में ही मोहें प्रभु के संग अभिनय करे दे

– नीरज सारंग

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