जीवन के रस्ते बारात मेरी

जीवन के रस्ते बारात मेरी
मंज़िल को मैने दूल्हन पुकारा
सजके वो डोली में बैठी ही होगी
राहों में मेरी सजदे में मेरी

कानों में गुंजन शहनाईयों की
रस्मों ने मुझको दूल्हा पुकारा
मेहमान बनके आऊँ मैं कैसे
राहों में मंज़िल सजदे में तेरी

होशो हवासो में देखी वो सूरत
दर्पण ने जिसको नर्गिस पुकारा
संगे-मरमर सी काया वो खुशबू बिखेरे
राहों में मेरी सजदे में मेरी

मंज़िल वो दुल्हन नजारों सी होगी
सितारों ने बक्शी वो पूनप सी होगी
कदमों से मेरे वो सोहबत में चलकर
वो पहचान मेरी जमाने में होगी

रचनाकार/कवि~ डॉ. रविपाल भारशंकर
(९८९००५९५२१)

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