रहूँ तो ऐसे रहूँ

रहूँ तो ऐसे रहूँ
कि जहाँ में हूँ के नहीं
जीऊँ तो ऐसे जीऊँ
कि जहाँ में सो के नहीं
करू गुजर बसर, रहूँ बेअसर
जाऊँ तो ऐसे जाऊँ
कि जहाँ ये रोके नहीं

रचनाकार/कवि~ डॉ. रविपाल भारशंकर
(९८९००५९५२१)

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