होश-ए-आजादी

आजादी तो एक ही हैं, मैं से मेरी मुक्ति
गुलामो के लिए कभी, जिंदगी नहीं रूकती

बुध्द आजाद हुअे, जिसस पैगंबर आजाद हुअे
नानक कबीर ओशो, कृष्णमूर्ती शाबास हअे
ये है आजादी, मैं से मेरी मुक्ति
गुलामो के लिए कभी, जिंदगी नहीं रूकती

पैदाइशी आजादी नहीं मिलती
मरने से आजादी नहीं मिलती
आजादी हैं बाहोश
बेहोश आजादी नहीं मिलती
होश तो एक हीं हैं, मैं से मेरी मुक्ति
गुलामो के लिए कभी, जिंदगी नहीं रूकती

रचनाकार/कवि~ डॉ. रविपाल भारशंकर
(९८९००५९५२१)

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