गुजरते गुजरते, गुजर जिंदगी

गुजरते गुजरते, गुजर जिंदगी
अकल की तरह, ना कि कल की तरह

कोल्हू के बैल की तरह, लगता है जेल की तरह
पैरो में बांध घुँगरू, नाचू मैं आज इतरा
बसरते बसरते, बसर जिंदगी
अमल की तरह, ना कि मल की तरह

दुनिया ये खेल की तरह, मैसेज इमेल की तरह
बेबंदन आज मैं मरु, संग तेरे साथ मितरा
सवरते सवरते, सवर जिंदगी
कमल की तरह, ना कि मल की तरह

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